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विद्यार्थी ध्यान दे:- सफलता आपकी कदम चूमेगी,सोच को रखे सकारात्मक,, पढ़िए पूरे ,,लेख,,

सफलता की ओर एक कदम आगे,,

STUDENTS MOTIVATER–P.BENNETT

आत्मनिर्भर बनो सफलता आपके कदम चूमेगी ,
विद्यार्थी जीवन एक ऐसा जीवन होता है ,जो सही मायने में जीवन का महत्वपूर्ण समय होता है, यही एक ऐसा अवसर होता है जिसे मनुष्य अपने भविष्य
के निर्माण कर सकता है ,
,,सफलता के लिए सकारात्मक सोच होना अनिवार्य है ,,
,प्रत्येक मनुष्य के अंदर दो बातें विद्यमान होता है ,,.
नकारात्मक– एक ऐसा विष होता है यदि मनुष्य के अंदर यह विष हावी हो जाता है, तो उस मनुष्य के मस्तिष्क को अपने कब्जे में ले लेता है, फिर वह हर एक बातों में नकारात्मक ढूंढने लगता है उसके द्वारा किया गया हर कार्य गलत दिशा की ओर ले जाता है ,कोई भी विद्यार्थी अपने मन में सोच लेता है कि मैं कमजोर हूं ,मुझे कुछ नहीं आता मैं पढ़ नहीं सकता इस तरह से नकारात्मक विचार उसके मस्तिष्क में घुस जाता है, व विद्यार्थी मानसिक रूप से पंगु होने के साथ शारीरिक रूप से भी कमजोर होने लगता है और वह मान लेता है कि मैं कुछ नहीं कर सकता। इस तरह से नकारात्मक सोच के कारण उसका जीवन अंधेरे की ओर अग्रसर होते जाता है ,कोई व्यक्ति सोचता है कि सब मेरा भाग्य का दोष है इसलिए मैं आगे बढ़ नहीं पा रहा हूं यदि ऐसा होता तो हर कोई ईश्वर पर दोष लगाता, यदि मनुष्य कहीं जाता रहता है उसी वक्त उसके सामने से बिल्ली रास्ते से गुजर जाती है तुरंत उसके मन में नकारात्मक बातें उत्पन्न होती है ,और सोचने लगता है यह अशुभ है, इसी तरह सोचते हुए आगे निकल जाता है इसी दौरान अचानक दुर्घटना घट जाती है , तो ऐसा लगता है बिल्ली ने रास्ता काट दी थी, इसलिए ऐसा हुआ क्योंकि असल में देखा जाए या उसका, नकारात्मक सोच था ,इसी तरह से कोई विद्यार्थी सोच लेता है कि मैं पढ़ नहीं सकता इतनी मोटी पुस्तक कैसे पढ़ हूं मैं तो कमजोर हूं इसी तरह से विभिन्न प्रकार के नकारात्मक बातें उसके मन में कार्य करने लगता है ,और गलत कार्य के द्वारा सफलता पाने की कोशिश करता है अंततः विफल होकर कायरता कदम उठा लेता है .!
सकारात्मक:-सकारात्मक सोच संजीवनी वटी की भांति होती है ,मस्तिष्क रूप से मृत व्यक्ति को जीवन का स्वास फूक दिया हो ,जो विद्यार्थी जीवन में हम मान लेता है कि प्रयास ही सफलता की प्रथम सीढ़ी है विद्यार्थी कभी हार कर मायूस नहीं होता क्योंकि वह जानता है कि जितने के लिए हारना जरूरी है क्योंकि जो गिरता है वहीं ऊपर उठता है सकारात्मक विद्यार्थी अपने विचार में सदैव सकारात्मक सोच को रखता है क्योंकि सकारात्मक विचार में ही उम्मीदें की किरणें छुपी होती हैं ,
आज के दौर में देखा जाए तो कम समय में हर कोई सफलता को हासिल करना चाहता है, जिनके कारण से अपने अंदर के आत्मविश्वास खो बैठता है , परिणाम स्वरूप एक बहुत बड़ा हानी को उठाना पड़ता है,,परंतु सकारात्मक विचार रखने वाले विद्यार्थी धैर्य रखता है और वह कभी हार नहीं मानता क्योंकि सकारात्मक सोच ही संजीवनी बूटी है जो मनुष्य को बचा सकता है .
आत्महत्या न करे आत्मनिर्भर बने, ,
एक विद्यार्थी का सबसे बड़ा दुश्मन होता है उसका मन ,आत्मविश्वास की कमी ,आत्म निर्भर ना होना क्योंकि विद्यार्थी जीवन ही एक ऐसा समय होता है जो खास उम्र के दहलीज पर होता है इस दौरान यदि विद्यार्थी अपने मन को काबू में कर लेता है और वह हर एक कार्य को आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भर बनकर स्वयं कड़ी मेहनत से अपनी मंजिल की ओर अग्रसर होता है उसे कार्य करने की इच्छा शक्ति प्राप्त होती है उस विद्यार्थी के लिए कोई भी विषय कठिन नहीं होता और वह अपने मेहनत व लगन से परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर समाज में अपनी पहचान बना लेता है इस कार्य को हर एक विद्यार्थी कर सकता है यदि इच्छा शक्ति आत्मविश्वास के साथ आत्म निर्भर होकर अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ता है ऐसे विद्यार्थी की सफलता ही स्वयं कदम चूमती है ,इस लिए आत्महत्या न करे आत्मनिर्भर बने।

विद्यार्थियों के लिए होता है अभिभावकों का महत्वपूर्ण भूमिका:- आज के दौर में देखा जाए तो अभिभावकों में भी नेगेटिव व ओवरकॉन्फिडेंस रखने वाले अभिभावक मिलते है, एक पिता को अपने बच्चे के लिए सफलता सोचना अच्छी बात है, पर,कभी कभी ऐसा हो जाता है, की बच्चे का मन अभिभावक जान नही पाते या जानकर भी अनदेखा करते है, हर किसी विद्यार्थी का रुझान भिन्न -भिन्न होता है ,वे अपने इच्छा के अनुसार विषय चुनकर अध्ययन करना चाहता है,, पर क्या होता है कई अभिभावक अपने बच्चे उच्च शिक्षा दिलाने के चक्कर मे अपनी इच्छा बच्चों पर थोपते है, विद्यार्थी आर्ट विषय लेकर पढ़ना चाहता है पर अभिभावक की इच्छा होता है कि गणित लेकर पढ़ाई करें इस लिए अपनी इच्छा को बच्चे पर जबरजस्ती थोप देता है ,,और ट्यूशन क्लास भी भेजता है पर विद्यार्थी का इच्छा नही होने के कारण, चाह कर भी पढ़ाई नही कर सकता अंततः विद्यार्थी असफल हो जाता ।
इस लिए अभिभावक अपने इच्छा को थोपने के बजाय बच्चे को जांचे ,और सकारात्मक विचार के साथ उन्हें तैयार करे ताकि बच्चे आसानी से सफलता को प्राप्त कर सके.

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