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मानव उत्थान सेवा समिति राष्ट्रीय एकता एवं सद्भावना ,प्रेम के दे रहे हैं संदेश

छ ग ब्युरो चीफ पी बेनेट

मानव उत्थान सेवा समिति तख़तपुर में बहा रहे है भक्ति के गंगा

 सत्संग के प्रारंभ गुरुवंदना से किया गया,, सैकड़ो भक्त जन भक्ति रस में सराबोर

कार्यक्रम स्थल पर धार्मिक पुस्तक व आर्युदिक दवाइयों का लगा स्टाल,,

श्रद्धालुओं ने प्रवचन रूपी गंगा में डुबकी लगा कर पाप रूपी बीमारी को धो रहे है

सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज के परम शिष्य महात्मा चित्र बाई जी का प्रवचन में कहा कि जीवन रूपी नौका को इस भवसागर से पार करने के लिए सत्संग रूपी गंगा में स्नान कर रहे हैं लोग मकर संक्रांति में दूर दूर जाकर स्नान करते हैं आप भाग्यशाली हैं जो कि आपके सामने चलता फिरता प्रयागराज रूपी सत्संग प्रवचन का अविरल धारा शाही स्नान कर रहे हैं प्रभु नाम रूपी साबुन से मन को धोए गा वहीं निर्गमन के शिष्य से प्रभु के दर्शन कर पाएगा ,जो मन को एकाग्र करे श्रद्धा पूर्वक ईश्वर की कथा कहते और सुनते हैं वह प्रेम मैविह्वल होकर गिर पड़ते हैं हंसते रोते और सुनते हैंरोते और कभी गाना गाने लगते हैं दूसरे के धन को मिट्टी के समान तुच्छ तथा पर स्त्री को माता समझते हैं तीनों लोगों की संपत्ति मिलने पर भी जिनका मन विषयों की ओर नहीं जाता है जो हर स्वास पर ईश्वर का नाम लेते रहता है वही मनुष्य उनका दर्शन कर पाते हैं।

अगर हम आदिम युग की बात करें तो पहले समय में आदमी जंगल में जानवरों की तरह रहते थे धीरे-धीरे आदमी की बुद्धि का विकास हुआ उसने अपने कौशल से असंभव कार्य को कर्मों द्वारा संभव कर दिया मनुष्य मनुष्य ने धीरे-धीरे अपनी कला को विकसित किया और हवाई जहाज समुद्री जहाज बना दिए पानी के नीचे चलने वाली पनडुब्बिय बना दी आज मनुष्य ऑक्सीजन मास्क और न्यूक्लियर सबमरीन की  सहायता से कई महीनों तक पानी में नीचे रख सकता है, उतना अधिक भौतिक विकास कर  लिया,आज डॉक्टर पीड़ित व्यक्ति को चिप लगाते हैं, वह मशीन व्यक्ति के हाथ को धड़का आएगी दिल चढ़ा है ब्रेन में चीफ डाल दी हुई हुई याददाश्त वापस आ जाती है ,आज मानव से क्यों नेताओं ने बंधा हुआ है महापुरुष समझाते हैं, कि की है मानव तुम प्राण शक्ति को समझाओ मानसिक गांठ नेगेटिव सोच आपको हमसे अलग कर रही है वर्तमान में हमारी सोच रही होगी तभी हम एक दूसरे के दुख को समझ सकेंगे, तभी कहीं जाकर हमारे मन में दूसरों के प्रति परोपकार की भावना जागेगी ।

आप लोग ध्यान की बात करते हैं पर वास्तव में ध्यान करने का पहले आपको बहुत प्राप्त करना है जैसे परिचय पत्र पर आपकी फोटो के साथ नाम उम्र पता तथा पद सब विवरण होता है फिर आप जिस भी विभाग में कार्य कर रहे हैं वहां यही चाहते हैं कि मेरा प्रमोशन उन्नति हो आपका यही प्रयास रहता है कि मैं अपने अधिकारी की नजरों में अच्छा रहूं उसके अनुकूल कार्य को अच्छे ढंग से करो अपने नाम गुण और स्वभाव से आप दूसरे को परिचय देते हो जीवन में सुख सुविधाओं के लिए आदमी प्रयासरत रहते इसलिए समय-समय पर महान पुरुष धर्म के वास्तविक ज्ञान मार्ग में भटक के मानव को ज्ञान भक्ति का सीधा सच्चा रास्ता बताते हैं जिसके मानव अपनी मंजिल तक पहुंच सके इस उद्देश्य के लिए उसके मनुष्य का शरीर मिला है शिक्षकों का रास्ता सभी धर्मों में मनुष्य को बोध कराती है।

मानव उत्थान  सेवा समिति से  महात्मा चित्रा बाई ने किया श्री पी बेनेट का सम्मान।

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