शिक्षक उमर कुरैशी की हुई ऐतिहासिक सम्मान

ब्यूरो रिपोर्ट

शिक्षक उमर कुरैशी की हुई ऐतिहासिक सम्मान

मुंगेली– शिक्षा जगत के शिक्षाविद अलौकिक कला में निपुण बरेला गांव में 40 वर्षो से शिक्षा के अलख जगाने वाले शिक्षक उमर कुरैशी की ऐतिहासिक सम्मान के साथ सेवानिवृत्त के दौरान विद्यालय परिवार ने नम आँखो से विदाई दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की छाया चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। शिक्षक उमर कुरैशी  की पुष्प वर्षा के साथ मंच पर आमंत्रित किया गया।मंच पर श्री कुरैशी को गिफ्ट हैम्पर व बुके से सम्मान किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगो की आंहे भर आई हर किसी की उनके विषय मे चर्चा करते  आंखे छलक उठी,क्योंकि विगत 40 वर्षों से एक विद्यालय में निरंतर शिक्षा की अलख जगाने वाले महान गुरु की विछोह में हर कोई ने अपने आप मे सुना महसूस कर रहे रहे थे। अपने नम्र ब्यवहार एवं कुशल नेतृत्व के साथ एक ही विद्यालय में वर्षो सेवा देकर इतिहास के पन्नो पर अपना नाम लिख दिया है।

उनके द्वारा पढ़ाये हुए विद्यार्थी अनेक उच्च पदों पर सेवा दे रहे है।यह गांव के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी।इस अवसर पर शिक्षक उमर कुरैशी ने छात्र छात्राओं एवं स्कूल स्टाफ को संबोधित करते हुवे अपने 43 वर्षो की शिक्षकीय कार्य के अनुभव व बरेला में 40 वर्षो से सेवा दे रहे अनुभव को साझा करते हुए कहा कि एक शिक्षक कभी रिटार्यड नही होते,

भलेे ही नौकरी से सेवानिवृत्त हो सकते हैं पर शिक्षक सदैव किसी न किसी रूप में समाज को रौशनी प्रदान करते है ,हरेक शिक्षको को यह जानना जरूरी है कि गुरु अबोध बालक बालिका की भविष्य निर्माता होता है चाहे जिस रूप में ढालना चाहे ढाल सकते है।क्योंकि गुरु ही एक ऐसा हस्ती है जो सदैव अपने शिष्य शिष्या  को आगे बढ़ाने हेतु तत्पर रहते है।

इस अवसर पर ईस्कूल प्राचार्य – पिंकी शर्मा, नेमगिरी गोस्वामी
समन्वयक – गौकरण डिंडोले लवीना लूथर, अनीता साहू, ज्योति नामदेव, मुन्नी पटेल प्रमिला कश्यप, अनुराधा साहू,कु माधवी यादव, उपासना गोपाल, कविता यादव अजय ध्रुव, दिलीप पटेल गायत्री ठाकुर , राजकुमारी शर्मा,कु उषा,कु पूनम यादव राजेन्द्र साहू, संजीव पांडेय
पंचायत – चन्द्र भूषण बांधे सीएमओ,) सुरेश बिसेन पद्मन क्षत्रिय पवन पटेल, वासुदेव पटेल मौजूद। रहे ,कार्यक्रम कुशल संचालन गौकरण डिंडोले आभार प्रदर्शन – दिलीप पटेल ने किया

तख़तपुर नगर में हुआ भब्य स्वागत

शिक्षा जगत में नाम रोशन करने में अहम भूमिका निभाने वाले, गुरु परम्पराओं को पुनर्जीवित कर शिष्यों के जहन में गुरु के प्रति प्रेम एवं सम्मान को उत्पन्न करने वाले शिक्षक उमर कुरेशी जिनकी सेवानिवृत्त के अवसर पर पहली बार एक शिक्षक का ऐतिहासिक स्वागत होना इस बात की प्रमाण है कि यदि करम बेहतर हो तो प्रशंसको की कमी नही होती इसका जीता जागता उदाहरण तख़तपुर नगर में देखा गया जहाँ बैंडबाजे के साथ नगर भ्रमण कर उनके निवास स्थान तक भब्य स्वागत किया गया।

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