घोंघा नदी की विभीषिका: काल के प्रवाह में बहे तीन मासूम, शोक-संतप्त समडील गाँव में छाया सन्नाटा
तखतपुर .ग्राम पंचायत समडील में घोंघा नदी के तीक्ष्ण प्रवाह ने तीन नन्हें चिरागों को सदा के लिए बुझा दिया। विद्यालय से गृह-आगमन के समय उपजे इस अकस्मात प्राकृतिक प्रकोप में बहे तीनों अबोध बालकों के पार्थिव शरीर अंततः बरामद कर लिए गए हैं। इस करुण दुर्घटना के पश्चात् से ही राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) का बचाव दल अनवरत खोज अभियान में संलग्न था।प्राप्त विवरण के अनुसार, समडील निवासी अनमोल जायसवाल (7 वर्ष), स्तुति जायसवाल (9 वर्ष) एवं शिक्षा जायसवाल (8 वर्ष) विद्याअर्जन के पश्चात् गृह-मार्ग पर अग्रसर थे। अल्प समय में दूरी तय करने की अभिलाषा में बालकों ने नदी के जलमार्ग से जाने का निर्णय लिया। इसी मध्य घोंघा नदी के अचानक विकराल हुए वेग ने उन्हें अपने पाश में जकड़ लिया और क्षण भर में तीनों मासूम जल-राशि के अतल में ओझल हो गए।
घटना की सूचना प्रसारित होते ही समडील में कोहराम मच गया। स्थानीय ग्रामीणों एवं पुलिस प्रशासन ने तत्परता दर्शाते हुए प्राथमिक खोज आरंभ की। तत्पश्चात् SDRF की कुशल टीम ने कमान संभालते हुए गहन रेस्क्यू अभियान संचालित किया। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप एक बालक का देहावसान पहले ही ज्ञात हो गया था, जबकि अवशेष दो संतानों की खोज में रात्रि भर नदी की उत्ताल तरंगों को मथा गया। रविवार की प्रातः काल की प्रथम किरण के साथ ही दोनों लापता बालकों के शव भी निष्कासित कर लिए गए, और इसके साथ ही यह अत्यंत पीड़ादायक खोज पूर्ण हुई।
दैव का क्रूर विधान देखिए कि तीनों मृत बालक एक ही कुटुंब के दो सहोदरों की संताने थे। अनमोल केजी-2 का छात्र था, जबकि स्तुति व शिक्षा तृतीय कक्षा में अध्ययनरत थीं। एक ही प्रांगण के तीन पुष्पों का इस प्रकार असामयिक मुरझा जाना समडील गाँव को गहरे शोक के अंधकार में ढकेल गया है। परिजनों का क्रंदन पाषाण हृदयों को भी द्रवीभूत कर रहा है।
यह मार्मिक त्रासदी वर्षाकाल में उफनती नदियों एवं प्राकृतिक आपदाओं के समक्ष बरती जाने वाली असावधानी के गंभीर परिणामों की ओर एक मूक संकेत करती है।
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