आठ बहनों का इकलौता भाई, खुमेश ने पेश की भाई-बहन के अटूट प्रेम की मिसाल
बहनों को दिया ऐसा अनमोल उपहार, जिसे जीवनभर नहीं भूल पाएंगी बहनें; आजीवन प्रेम और रिश्ते की डोर मजबूत रखने का लिया संकल्प
मुंगेली..भाई-बहन का रिश्ता केवल खून का रिश्ता नहीं होता, यह स्नेह, विश्वास, त्याग और जीवनभर साथ निभाने का वह भावनात्मक बंधन है, जिसकी मिठास समय के साथ और गहरी होती जाती है। इसी अटूट रिश्ते को सच्चे अर्थों में निभाते हुए ठकुरीकापा गांव के खुमेश कुमार जायसवाल ने अपनी आठ बहनों के लिए ऐसा अनमोल उपहार दिया, जिसने भाई-बहन के प्रेम की एक नई मिसाल कायम कर दी।
आठ बहनों के इकलौते भाई खुमेश कुमार जायसवाल ने रक्षाबंधन के अवसर पर अपनी बहनों को केवल कोई भौतिक उपहार नहीं दिया, बल्कि उन्हें आजीवन प्रेम, सम्मान और भाईचारे के बंधन को अक्षुण्ण रखने का संकल्प दिया। उनका यह भाव पूरे गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। बहनों के प्रति उनके स्नेह और जिम्मेदारी ने यह संदेश दिया कि भाई-बहन का रिश्ता किसी एक पर्व या एक दिन तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवन के हर पड़ाव पर एक-दूसरे का संबल बनने का नाम है।
आठ बहनों के बीच एक भाई का अनमोल संसार
खुमेश के जीवन में उनकी आठों बहनों का स्थान बेहद खास है। बचपन की नोक-झोंक से लेकर जीवन के उतार-चढ़ाव तक बहनों ने जहां भाई के जीवन में स्नेह और अपनापन भरा, वहीं खुमेश ने भी भाई होने के दायित्व को हमेशा प्रेम के साथ निभाने का प्रयास किया।
रक्षाबंधन के अवसर पर जब बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधी, तो वह क्षण केवल एक पर्व की रस्म नहीं रहा। राखी की उस डोर में बचपन की यादें, बहनों का स्नेह और भाई का संरक्षण भाव एक साथ जुड़ गया। खुमेश ने भी अपनी बहनों को ऐसा उपहार दिया, जिसमें वस्तु से अधिक भावना और रिश्ते की कीमत थी।
उन्होंने अपनी बहनों के साथ जीवनभर प्रेम और आपसी विश्वास बनाए रखने का संकल्प लेते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, भाई-बहन के रिश्ते में कभी दूरी नहीं आने देंगे। उनके लिए बहनों का स्नेह किसी संपत्ति या उपहार से कहीं अधिक मूल्यवान है।
उपहार से बड़ी थी भावना
आज के दौर में जहां त्योहार अक्सर औपचारिकताओं तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं खुमेश की यह पहल रिश्तों की वास्तविक खूबसूरती को सामने लाती है। उन्होंने यह साबित किया कि किसी रिश्ते को खास बनाने के लिए महंगे उपहार नहीं, बल्कि सच्चे मन से निभाया गया प्रेम और साथ का वादा ही पर्याप्त है।
उनकी बहनों के लिए यह उपहार इसलिए भी यादगार बन गया, क्योंकि इसमें भाई का वह भाव छिपा था जो शब्दों से कहीं अधिक गहरा था—“बहनें जीवन में चाहे जहां रहें, भाई का प्रेम और साथ हमेशा उनके साथ रहेगा।”
गांव में बनी चर्चा, रिश्तों के लिए बना संदेश
खुमेश कुमार जायसवाल की इस पहल की गांव में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि भाई-बहन के रिश्ते की ऐसी आत्मीय तस्वीर आज के समय में समाज के लिए भी एक सुंदर संदेश है। यह पहल नई पीढ़ी को यह समझाने वाली है कि रिश्ते केवल सामाजिक परंपराओं से नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान, विश्वास और जिम्मेदारी से जीवित रहते हैं।
आठ बहनों के बीच इकलौते भाई खुमेश ने अपने इस भाव से यह संदेश दिया कि राखी की डोर कलाई पर कुछ क्षणों के लिए बंधती है, लेकिन भाई-बहन का प्रेम पूरे जीवन हृदय में बंधा रहता है।उनका यह संकल्प केवल एक भाई का अपनी बहनों से किया वादा नहीं, बल्कि उस पवित्र रिश्ते के प्रति सम्मान है, जिसे समय, दूरी और परिस्थितियां भी कभी कमजोर नहीं कर सकतीं। सच ही कहा गया है—भाई-बहन का रिश्ता दुनिया का वह रिश्ता है, जिसमें बचपन की शरारतें भी याद बन जाती हैं और उम्र बढ़ने के साथ वही यादें जीवन का सबसे खूबसूरत सहारा बन जाती हैं।
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