सांसद-विधायक निधि में गबन पर कठोर रुख: विलंबित व अधूरी परियोजनाओं पर अब सीधी प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश
तखतपुर में सबसे अधिक अनियमितताएं, 11 प्रकरणों में करीब ₹38 लाख का आहरण, फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं
बिलासपुर। सांसद एवं विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत स्वीकृत व हस्तांतरित धनराशि के बावजूद यदि दो वर्षों से अधिक समय से निर्माण कार्य अधूरा अथवा अप्रारंभ रहता है, तो संबंधित कार्यदायी संस्था के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन के नवीन आदेशानुसार, ऐसे प्रकरणों में उप-संभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के न्यायालय में राजस्व वसूली की धीमी प्रक्रिया अपनाने के बजाय, इसे सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग एवं गबन का मामला मानते हुए सीधे पुलिस थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) पंजीकृत कराई जाएगी।
तखतपुर में 11 प्रकरण, करीब ₹38 लाख का आहरण
जिले में सांसद एवं विधायक निधि से जुड़े मामलों की समीक्षा के दौरान तखतपुर क्षेत्र में सर्वाधिक अनियमितताएं सामने आई हैं। जिले में लगभग 20 ऐसे मुख्य प्रकरण चिह्नित किए गए हैं, जहां धनराशि आवंटन के उपरांत भी कार्य ठप्प है। इनमें से केवल तखतपुर क्षेत्र के ही 11 मामले सम्मिलित हैं।
इन मामलों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा लगभग ₹38 लाख का आहरण करने के पश्चात भी कार्य आरंभ नहीं किया गया। धनराशि जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं होना प्रशासनिक स्तर पर गंभीर विषय माना जा रहा है।
दो वर्षों से अधिक समय से लंबित कार्यों पर अब सख्ती
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सांसद एवं विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत स्वीकृत और हस्तांतरित धनराशि के बावजूद यदि निर्माण कार्य दो वर्षों से अधिक समय से अधूरा अथवा अप्रारंभ रहता है, तो संबंधित कार्यदायी संस्था के विरुद्ध अब कठोर दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि लंबे समय तक कार्यों का लंबित रहना और धनराशि के उपयोग के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होना सरकारी व्यवस्था के प्रति गंभीर लापरवाही के साथ-साथ वित्तीय अनियमितता का मामला है।
राजस्व वसूली की प्रक्रिया के बजाय सीधे एफआईआर
अब तक ऐसे मामलों में उप-संभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के न्यायालय में राजस्व वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। लेकिन इस प्रक्रिया में होने वाले विलंब को देखते हुए जिला प्रशासन ने अपना रुख सख्त किया है।
नवीन आदेश के अनुसार, स्पष्ट सरकारी धन के दुरुपयोग एवं गबन के मामलों में सीधे पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इसके साथ ही संबंधित कार्यदायी संस्था के विरुद्ध दंडात्मक कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
समीक्षा में सामने आई कार्यों की वास्तविक स्थिति
विकास कार्यों एवं वित्तीय स्वीकृतियों की गहन समीक्षा के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि धनराशि जारी होने के वर्षों बाद भी कतिपय एजेंसियों ने धरातल पर निर्माण कार्य प्रारंभ ही नहीं किया है।
धनराशि के आहरण के बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं होने तथा लंबे समय से परियोजनाओं के अधूरे पड़े रहने को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इसी के चलते अकारण विलंब तथा राजस्व वसूली की सुस्त प्रक्रिया को समाप्त करने के लिए जिलाधिकारी ने प्रशासकीय एवं वित्तीय अनियमितता के मामलों में तात्कालिक पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
समीक्षा बैठक में मंत्री ने जताई थी नाराजगी
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तथा जनपद के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने हालिया समीक्षा बैठक में सांसद निधि के अपूर्ण व लंबित पड़े विकास कार्यों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया था।
प्रभारी मंत्री के कड़े रुख के बाद जिला प्रशासन ने लंबित एवं अधूरे विकास कार्यों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।अब मध्यस्थता नहीं, सीधे आपराधिक कार्रवाई
प्रभारी मंत्री के कड़े रुख के उपरांत आयोजित प्रशासनिक बैठक में जिलाधिकारी संजय अग्रवाल ने अंतिम चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि स्पष्ट गबन के मामलों में अब कोई मध्यस्थता या शिथिलता नहीं बरती जाएगी।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जहां सरकारी धन का दुरुपयोग अथवा गबन स्पष्ट रूप से सामने आएगा, वहां दोषियों पर सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
तखतपुर पर प्रशासन की विशेष नजर
जिले के चिह्नित लगभग 20 मुख्य प्रकरणों में 11 मामले तखतपुर क्षेत्र से जुड़े होने के कारण यह क्षेत्र प्रशासन की समीक्षा में विशेष रूप से सामने आया है। करीब ₹38 लाख के आहरण के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने का मामला अब प्रशासनिक सख्ती के केंद्र में है।
ऐसे में आने वाले दिनों में इन प्रकरणों में संबंधित एजेंसियों की भूमिका, आहरित राशि और लंबित निर्माण कार्यों की स्थिति की जांच के साथ कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए जाने की संभावना
सख्त प्रशासनिक निर्देश:
प्रभारी मंत्री के कड़े रुख के उपरांत आयोजित प्रशासनिक बैठक में जिलाधिकारी संजय अग्रवाल ने अंतिम चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि स्पष्ट गबन के मामलों में अब कोई मध्यस्थता या शिथिलता नहीं बरती जाएगी, बल्कि दोषियों पर सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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