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पथरिया नगरी निकाय के चुनाव के लिए अध्यक्ष पद आरक्षित होने के बाद नशा दावेदारों के सर चढ़ कर बोल रहे है,,

छ ग ब्यूरो चीफ पी बेनेट

पथरिया- अध्यक्ष पद आरक्षित होने के बाद पार्षद पद के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है पान दुकान से लेकर चाय की दुकानों में भी इन दिनों चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
27 तारिक को पार्षद पद का आरक्षण घोषित होना है।
पथरिया नगर पंचायत में नगरी निकाय चुनाव के लिए पार्टी अभी से कमर कसने लगी है एक ओर जहां अध्यक्ष पद आरक्षित वर्ग के होने के बाद जहां भाजपा और कांग्रेस के अध्यक्ष पद के दावेदारों की होड़ जमा होना शुरू हो गया है वहीं दूसरी ओर पार्षद पद के लिए दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता अपनी सीट पक्की करने के लिए लगे हुए है। लेकिन मजेदार बात यह है कि जो पिछले वर्षों में जो कूटघाट किए वही लोग आज पार्षद पद के लिए अपने जोर आजमाइश कर रहे हैं। पिछले 5 वर्षों में जहां अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित था वहीं इस बार अनुसूचित जाती मुक्त कर दिया गया है । पिछले पांच वर्षीय चुनाव में बहुत ही कम अंतर से पथरिया नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेसी प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। सरकार बदलते ही इस बार नगर पंचायत में कांग्रेस प्रत्याशी की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है वहीं पार्षद पद के लिए बात किया जाए तो पथरिया नगर पंचायत में जहां 15 वर्षों में 9 वार्डो में बीजेपी ने अपना परचम लहराया था ।1 सीट में कांग्रेस को जीत मिली थी वहीं पांच प्रत्याशी निर्दलीय के रूप में चुनाव जीतने में सफल हुए थे लेकिन जैसे ही प्रदेश की राजनीति फिसा में बदलाव देखने को मिला वैसे ही कांग्रेस प्रत्याशियों की बात की स्थिति उत्पन्न हो गई है एक और जैसे पिछले कार्यकाल में पार्षद प्रत्याशियों के लिए कूटघात किए थे वही प्रत्याशी अब कांग्रेश से पार्षद पद के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं अब यह देखने लायक होगा की इस बार जो पिछले कार्यकाल में पार्टी के लिए अधिकृत प्रत्याशी को हराने के लिए काम किए थे क्या उनको इस बार पार्टी अपना उम्मीदवार बनाते है या फिर जिताऊ उम्मीदवार उतारते हैं यह देखने वाली बात होगी लेकिन दूसरी ओर अभी से ही चाय और पान की दुकानों में चर्चा शुरू हो गई है सुबह से ही नए-नए चेहरे पथरिया की बस स्टैंड में देखने को मिल जाएगा वही मोहल्लों में भी चर्चा अब जोर पकड़ रही है दोनों ही पार्टी का चुनावी बैठक एक बार संपन्न भी हो गया है वहीं निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है वहीं तीसरी शक्ति के रूप में इस बार नगरी निकाय चुनाव में जोगी कांग्रेस के कार्यकर्ता बाजार में नजर तो नहीं आ रहे हैं लेकिन अंदर खाने में पार्टी को जिताने के लिए जोड़-तोड़ भी राजनीति शुरू कर दिए हैं ।अब देखने वाली बात होगी कि चुनाव आयोग नगरी निकाय चुनाव की तारीख कब घोषित करता है।

*पार्षद बनने का सपना देखने वालों की उड़ी नींद*

पार्षदों का आरक्षण 27 सितंबर को होना है इसके इंतजार में पार्षद बनने का ख्वाब फाड़ रहे कई नेताओं की नींद उड़ गई है क्योंकि नए परिसीमन में कई वार्डों की भौतिक स्थिति बदल गई है जो नेता जिस वार्ड में 5 साल से अपने लिए जमीन तैयार कर रहे थे, वह सब खिसक चुका है। दूसरे वार्डो से चुनाव लड़ने का मौका मिल भी जाए तो जीत के लिए और जूता पाना आसान नहीं होगा।

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